न्यायपालिका के इतिहास में सबसे प्रभावशाली जज अरुण मिश्रा के भूमिका को हमेशा “याद रखा जाएगा”

इससे पहले कि हुजूर के शान में चार शब्द पेश करने की गुस्ताखी करूं मैं अपने वकील साहब (*प्रशांत भूषण नहीं )  से सुनिश्चित कर लिया है, अब हुजूर के बारे में ट्वीट या पोस्ट करने पर माननीय न्यायलय का अवमानना नहीं समझा जायेगा। चूंकि न्यायलय के प्रति मेरी अटूट आस्था है इसलिए हुजूर से दरख्वास्त है कि आगे कहे जाने वाले शब्दों को कृपया अपने तक ही संबंधित रखने की कृपा करें।

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